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हिंदुस्तान पेपर में प्रकाशित किया गया कुछ मरीजों की कहानियाँ !जिनका झारखंड औषधालय के द्वारा सफल इलाज़ किया गया था!

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हमने झारखंड औषधालय में विश्वास किया हृदय रोग से मुक्ति पायाः गोकुल चंद जयसवाल

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लोहरदगा स्थित झारखंड औषधालय ने मेरे जीवन में खुशियों का वह पल दिया, जिसकी कल्पना न तो हमने किया था, न ही मेरे परिजनों ने। यह कहना है बिहार के कैमूर जिले के मोहनिया निवासी गोकुल चंद जायसवालका। वह लगभग दो वर्ष पहले हृदय रोग से ग्रसित थे। श्री जायसवाल ने बताया कि अचानक उनके हृदय में दर्द हुआ। लोगों ने कहा कि ब्लड प्रेशर की वजह से यह दर्द हुआ है, पर दर्द बढ़ता गया ।राहत के लिए कैमूर में प्राथमिक उपचार कराया। डॉक्टरों ने हमें वाराणसी में इलाज़ के लिए भेज दिया। प्राथमिक उपचार के दौरान ही वाराणसी के डॉक्टरों ने कहा कि आप की हालत काफी बिगड़ चुकी है। जीवन बचाने के लिए शीघ्र ऑपरेशन करना जरूरी है। इस पर हम और हमारे परिवार के लोग भयभीत हो गए।मानो पैरों तले जमीन खिसक गई हो।आर्थिक रूप से हम उतने संपन्न नहीं थे, कि तत्काल पैसे की व्यवस्था कर सके। ऑपरेशन के लिए हम लोगों ने डॉक्टर से विनती की कि कुछ तत्काल राहत जो इनके दर्द को कम कर सके ऐसी दवा दें। हम सभी पैसे की जुगाड़ में लग गए। मोहनिया लौटे तो पैसे की जुगाड़ क्या करेंगे, उनकी परेशानी में ही फंसे रह गए। पड़ोस के एक परिवार ने हिंदुस्तान अखबार में झारखंड के लोहरदगा शहर में स्थित झारखंड औषधालय के बारे में छपे मैटर को दिखाया। जिसमें लिखा था, कि बिना ऑपरेशन केही हृदय रोगियों का इलाज़ स्थाई रूप से शत-प्रतिशत ठीक हो जाता है। यह खबर मानो हमारे परिवार के लिए उर्जा संचार करने वाला साबित हुआ। हम लोगों ने बिना देर किए लोहरदगा झारखंड औषधालय पहुंचे। यहां के डायरेक्टर और अन्य हकीम-वैध से विमर्श किया। उन्होंने जो आत्मीय भाव से हम लोगों को विश्वास दिलाया, कि आप चिंता न करें आप पूरी तरह से दुरुस्त किया जाएगा। हृदय रोग जड़ से खत्म हो जाएगा। वह भी प्रकृति रूप से जड़ी-बूटियों से बनी दवाइयों के माध्यम से। सचमुच यह हुआ भी। आज हम बिल्कुल चंगे हो गए हैं। दवा बंद हो गई है कोई परहेज नहीं है। कोई दिक्कत नहीं है। आप विश्वास कीजिए हम आपको बता रहे हैं, कि पिछले कई महीनों से हम पैदल भी चल रहे हैं।झोला लेकर सब्जी भी लाते हैं। सारे काम भी कर रहे हैं। चाहे वह भारी काम ही क्यों न। परेशानियों से झारखंड औषधालय ने हमको निजात दिलाया है। हम यहाँ के डायरेक्टर, हकीम और पूरी टीम के प्रति आभारी हैं। देश के आम आवाम से गुजारिश करते हैं, कि एक बार ऑपरेशन से बचें, और यहां अपना इलाज़ करा कर हमारे जैसा चंगा और दुरुस्त बन जाइए। भाइयों भरोसा न तो हमारे फोन नम्बर 9973045545 पर हमसे बात कर हकीकत से रु-ब-रुहो सकते है।हमने विश्वास किया आप भी कर, कर देखो।'

गॉल ब्लाडर की पथरी का सफल इलाज़ बगैर किसी ऑपरेशन के

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मेरा नाम सिवनती कुमारी है. मैं रांची में रहती हूं और मेरा अपना घर धरकोरी, जगाटोली, गुमला है, पति का नाम विनय मिंज है. मेरी उम्र 30 वर्षे है.एक दिन अचानक मेरे पेट में दर्द उठा और बढ़ता ही चला गया. जब दर्द कंट्रोल नहीं हुआ तब मेरे घरवाले रांची स्थित एक नजदीक के हॉस्पिटल में ले गये. दर्द का इंजेक्शन से दर्द कंट्रोल हो गया.अल्ट्रासाउंड कराने से पता चला कि गॉल ब्लाडर में 6एम.एम.के कई पत्थर हैं. डाक्टर ने ऑरेशन की सलाह दी. मेरे पति को ऑरेशन से होने वाली परेशानी का पता था. क्योकिं जब गॉलब्लाडर की पथरी का ऑरेशन होगा तो पथरी के साथ पूरा गॉलब्लाडर को भी निकाल दिया जायेगा. जिसका गॉलब्लाडर निकल गया है, उसको तरह-तरह की परेशानी होती रहती है.यही सब बातों को लेकर मेरे पति शहर के कई नामी गिरामी डाक्टरों से संपर्क किया. सभी का यही कहना था कि पथरी का बगैर ऑपरेशन के कोई इलाज़ नहीं. लेकिन ढूंटने से क्या नहीं मिलता, एक दिन मेरे दोस्त ने एक पेपर लाकर दिया. जिसमें झारखंड औषधालय एंड रिसर्च सेंटर के पता के साथ लिखा हुआ था कि यहां गॉलब्लाडर की पथरी छोटी हो या बड़ी बगैर किसी ऑपरेशन के पूरा-पूरा निकल जाता है. मेरे पति झारखंड औषधालय एंड रिसर्च सेंटर मुझे लेकर पहुंच गये. मैं यहां से दवा लेकर जो कि खाली जड़ी-बूटी की बनी हुई थी.घर आकर दवा का सेवन शुरू की.दवा खाते ही मेरी उल्टी बंद हो गयी, गैस बनना खत्म हो गया और दर्द वगैरह बिल्कुल खत्म था. फिर इसी तरह हमने पूरा कोर्स कर लिया और जब अल्ट्रासाउंड कराया तो पत्थर बिल्कुल खत्म था.पीत की थैली में जरा सा भी पत्थर नहीं बच गया था.मैं और मेरा परिवार झारखण्ड औषधालय के लिए दिल से बहुत-बहुत बधाई देते हैं.

हर तरह के बवासीर का पूर्ण ईलाज हुआ संभव

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खूनी, बादी, भगंदर और नासूर, नया और पूराना से पूराना बवासीर का ईलाज बगैर किसी चिर-फाड़ से संभव हो गया है। बवासीर होने के मुख्य कारण : (1) कब्ज होने के वजह से (2) पेट की गर्मी से, ज्यादा मसालेदार भोजन करने से और (3) अधिक समय तक शौचालय में शौच करने से। मेरा नाम इमतियाज अहमद अंसारी है। मेरी उम्र 56 वर्ष है। वैसे मैं बहुत तंदरुस्त था मगर एक दिन मेरे पेट में गर्मी का एहसास हुआ और कुछ कब्ज हुआ और जब शौच करने गया तो खून देखकर मैं घबरा गया। मैंने कई जगह से ईलाज करवाया मगर पूर्ण तरह से फायदा नहीं हुआ। कुछ दिनों के बाद मेरी बिमारी बढ़ने लगी।ज्यो-ज्यो दवा कराता गया मर्ज बढ़ता गया। पहले तो सिर्फ खून ही जाता था और कमजोरी लगती थी। लेकिन बाद में ऐसा हो गया कि दर्द काफी बढ़ गया और शौच के रास्ते में सूजन हो गया। दर्द और सूजन के कारण पेशाब बंद हो गया। पाईप लगाना पड़ गया। रांची में बवासीर का ऑपरेशन हुआ। कुछ दिनों तक राहत मिली पर मवाद जाना बन्द नहीं हुआ और दर्द भी बढ़ने लगा। अब तो मेरे घर वाले वेल्लोर ले जाने की तैयारी करने लगे। तभी मुझे पता चला कि झारखण्ड औषधालय एवं रिसर्च सेंटर, लोहरदगा में किसी भी तरह का बवासीर का ईलाज होता है और मवाद जाना भी बन्द हो जाता है और कैंसर होने का डर भी खत्म हो जाता है। बगैर किसी देर किये मैं यहां आया और ईलाज करवाया। अब मेरी बिमारी बिलकुल खत्म हो चुकी है। काश मुझे यहां के बारे में पहले पता चल गया होता तो मैं ऑपरेशन करवाने से बच जाता। जबकि मुझे मालूम था कि बवासीर का ऑपरेशन कामयाब नहीं होता है।

झारखण्ड औषधालय ने मेरी जान बचाई

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मेरा नाम शफकत अली है। मैं ग्राम-कमता, पो. कुच्चु, थाना-ओरमांझी, जिला-रांची, झारखंड का रहने वाला हूँ तथा मेरा मोबाइल सं. 06206541495 है। मेरी उम्र 48 वर्ष है। मैं सामान्य जिंदगी जी रहा था। अचानक एक दिन मेरी किडनी के पास दर्द उठा फिर मैं डॉक्टर से मिला । डॉक्टर ने किडनी में खराबी बताई जिसका मुझे यकीन नहीं हुआ और मैं वेल्लोर जांच के लिए चला गया। वहाँ के डॉक्टर ने मुझे किडनी के खराबी के वजह से जल्द से जल्द किडनी ट्रांसप्लांट का सुझा दिया। चूंकि ट्रांसप्लांट का खर्च बहुत ज्यादा था मैं पैसे देने को असमर्थ था। मैं डॉक्टर से वक्त लेकर घर वापस चला आया। मेरी तबीयत अब और बिगड़ने लगी थी, कमजोरी और उल्टियों से परेशान हो गया था, चारपाई से उठना मेरे लिए दूभर हो गया, मुझमें अब जीने की आशा नही रही थी, गाँव और घरवालों के सुझाओं के बाद मुझे डॉक्टर के पास वेल्लोर फिर जाना पड़ा। डॉक्टर ने किसी और तरह से इलाज़ को मना कर दिया और जल्द से जल्द पैसा जमा करने को कहा। फिर गाँव वालों ने चंदा इकटठा करने का काम शुरू कर दिया। इसी क्रम में मैं मैंने अखबार में झारखण्ड औषधालय का विज्ञापन देखा और वहाँ जा कर हमीम जी से मिला। उन्होंने हमारा इलाज़ आयुर्वेदिक औषधि के द्वारा किया जिससे कुछ ही दिन में मुझे इसका असर होता महसूस हुआ और मैं धीरे-धीरे स्वस्थ हो गया। आज मैं बिल्कुल तंदरूस्त हूँ और मेराजीवन पुनः सामान्य चल रहा है। किसी तरह की काई परेशानी नहीं है।

झारखण्ड औषधालय ने मेरी जान बचाई

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मेरी मां तारा देवी हृदय (heart)की मरीज थी उनके पूरे शरीर में सूजन आ चुकी थी तथा उन्होंने जीने की आस छोड़ दी थि! रांची से वेल्लोर तक इलाज़ कराया। कोई लाभ ना दिखा फिर किसी दोस्त के द्वारा मुझे झारखंड औषधालय के बारे में पता चला और यकीन मानिए यहां सिर्फ 4 महीने का कोर्स के बाद मेरी मां आज पूरी तरह स्वस्थ है एवं झारखंड औषधालय को बहुत-बहुत आभार प्रकट करती हैं।